मोर्चा निकालकर भारतीय बौद्ध महासभा ने कोरपना तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

लोकदर्शन गडचांदुर👉अशोककुमार भगत

बौद्ध गया में स्थित ऐतिहासिक महाविहार के प्रबंधन का अधिकार बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर भारतीय बौद्ध महासभा ने मोर्चा निकालकर तहसीलदार कोरपना के माध्यम से भारत सरकार के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

भारतीय बौद्ध महासभा के तालुका अध्यक्ष श्रवण जीवने द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए इस ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सम्राट अशोक ने ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में महाबोधि महाविहार की स्थापना की थी। लेकिन वर्तमान में इस स्थल का प्रबंधन बौद्ध समाज के पास नहीं है। वहाँ हिंदू परंपराओं के अनुसार कर्मकांड किए जा रहे हैं, जिससे मूल बौद्ध संस्कृति को उचित स्थान नहीं मिल रहा है।

मोर्चे मे बौद्ध समाज की प्रमुख मांगें:

1. महाबोधि महाविहार (बोधगया, बिहार) एक पवित्र बौद्ध धार्मिक स्थल है, इसलिए 1949 का अन्यायपूर्ण कानून रद्द किया जाए।

2. बोधगया स्थित महाविहार के प्रबंधन की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों को सौंपी जाए।

3. महाविहार का मूल स्वरूप बनाए रखने के लिए विशेष विकास निधि प्रदान की जाए।

इन मांगों को लेकर देशभर के बौद्ध समाज द्वारा तीव्र आंदोलन शुरू है। भारतीय बौद्ध महासभा गडचांदुर ने सरकार से अनुरोध किया है कि 1949 के प्रबंधन कानून की समीक्षा कर उसमें संशोधन किया जाए। यह मोर्चा PWD रेस्ट हाऊस से निकालकर तहसील कार्यालय पर लेकर गये.
मोर्चे की सफलता हेतू के.एन.सोनंडवले, राहुल निरांजने,पद्माकर खैरे,सोमा गोंडाने,हेमचंद दुधगवली,मधुकर चुनारकर,विश्वास विहिरे, बादल चांदेकर, विक्की खाडे,अशोक उमरे,दिव्यकुमार बोरकर, उत्तम परेकर ,विजय खाडे,नितीन भगत,पंकज निरंजने,किरण मोडक,आशा सोंनडवले,सीमा खैरे,बेबी वाघमारे,माधुरी पेटकर,वर्षा निरंजने,छाया मोडक,शीला निरांजने आदी ने प्रयास किया.

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